चालक लोमड़ी की कहानियां | Chalak Lomdi Ki Kahani

 

chalak lomdi ki kahani in hindi
चालक लोमड़ी की कहानी 

चालक लोमड़ी की कहानी | Chalak Lomdi Story in Short -

लोमड़ी को जंगल का बहुत ही चालाक जानवर माना जाता है। लोमड़ी जंगल का एक ऐसा प्राणी  है जिसकी चालाकी की बहुत सी कहानियां प्रसिद्ध है। बचपन से हमारे दादा-दादी हमें चालाक लोमड़ी की कहानियां सुनाते आए हैं। लोमड़ी की चालाकी से संबंधित कुछ कहानियां इस प्रकार हैं -

बोलने वाली गुफा और चालक लोमड़ी - हिंदी कहानियां 

 एक समय की बात है एक जंगल में खतरनाक शेर रहता था। एक बार जंगल में शेर ने शिकार करने का बहुत प्रयास किया किंतु उसे सफलता नहीं मिली। शिकार की तलाश में शेर को शाम हो गई ठंडी का मौसम था।

शेर ने सोचा कहीं किसी पास की गुफा में आराम किया जाए। तभी शेर को सामने एक गुफा दिखलाई दी शेर गुफा के अंदर चला गया । शेर ने सोचा - " अवश्य ही है यह  गुफा किसी जानवर की होगी और वह शाम को इसमें वापस आएगा तो मैं उसी का शिकार कर अपना पेट भर लूंगा।"

 वह गुफा एक लोमड़ी की थी । शाम होते ही लोमड़ी अपनी गुफा में वापस लौटी , तभी उसे गुफा के सामने शेर के पंजों के निशान दिखलाई दिए । शान केवल गुफा के अंदर जाने के थे बाहर आने के कोई निशान नहीं थे। लोमड़ी बहुत चालाक थी चालाक लोमड़ी को लगा कि अवश्य ही मेरी गुफा में कोई शेर चला गया है अगर मैं गुफा में जाऊंगी तो वह मुझे आ जाएगा। 


chalak lomdi story in hindi with moral
लोमड़ी की कहानियां

तभी चालाक लोमड़ी के दिमाग में एक युक्ति सूझी । वह गुफा से दूर खड़ी होकर जोर-जोर से बोलने लगी  - " ओ  मेरी प्यारी गुफा ! तू मुझसे रोज बात करती है किंतु आज तू मुझसे बात क्यों नहीं कर रही है।"

 गुफा के अंदर बैठे शेर को लगा कि हो सकता है यह गुफा लोमड़ी से बात करती हो किंतु मेरे डर के कारण आज यह बात नहीं कर रही है। तभी दोबारा लोमड़ी बोली - "  मेरी गुफा तू मुझसे बात क्यों नहीं कर रही है । अगर तू मुझसे बात नहीं करेगी तो मैं वापस चली जाऊंगी। "

लोमड़ी की इस प्रकार की बात सुनकर शेर को लगा कि अगर गुफा नहीं बोली तो लोमड़ी वापस चली जाएगी इसलिए शेर आवाज बदलकर बोला- "  अरे मेरी प्यारी सहेली!  मैं कब से तुम्हारा ही इंतजार कर रही हूं । तुम अन्दर  क्यों नहीं आ रही हो। "

 आवाज सुनते ही लोमड़ी समझ गई कि गुफा  के अंदर अवश्य ही कोई शेर है और बिना एक पल की देरी  किए लोमड़ी वहां से भाग गई। इस प्रकार चालाक लोमड़ी ने होशियारी से अपनी जान बचा ली और शेर को भूखा ही रहना पड़ा। 

शिक्षा - चालाक लोमड़ी और शेर की कहानी से हमें शिक्षा मिलती है कि अपनी होशियारी से आने वाली बड़ी से बड़ी मुसीबत को भी टाला जा सकता है।

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