भालू और शेर की कहानी | Chidiyghar ke Bhalu aur Sher ki kahani

 

चिड़िया घर का भालू - एक कहानी
चिड़िया घर का भालू 


 चिड़ियाघर के भालू और  शेर की कहानी | Bhalu aur Sher ki kahani


एक शहर में एक चिड़ियाघर था उस चिड़ियाघर में एक भालू, एक शेर रहते थे। दूर-दूर से लोग शेर और भालू को देखने के लिए चिड़ियाघर आते थे। चिड़ियाघर के मालिक का नाम छोटू था। छोटू बहुत ही लालची स्वभाव का आदमी था । वह चिड़ियाघर में आने वाले हर व्यक्ति से एंट्री फीस लेता था जिससे वह चिड़िया घर से मोटी कमाई करता था।

एक दिन की बात है भालू बीमार हो गया । छोटू ने भालू का इलाज कराया किंतु वह भालू को नहीं बचा सका। अब छोटू बहुत परेशान था क्योंकि भालू के मर जाने के कारण चिड़ियाघर में आने वाले लोगों की संख्या में तेजी से कमी आ रही थी। छोटू ने सोचा कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो एक दिन उसका चिड़ियाघर ही बंद हो जाएगा।

छोटू ने आसपास के क्षेत्र में दूसरे भालू की तलाश की किंतु चिड़ियाघर के लिए उसे कहीं कोई भालू नहीं मिला। छोटू दिन-व- दिन और अधिक परेशान होने लगा । एक दिन छोटू के दिमाग में एक तरकीब सूझी। छोटू रमेश नाम के व्यक्ति के पास गया और उससे बोला - " रमेश ! क्या तुम भालू बनोगे ? मैं तुम्हें इसके बदले बहुत सारा पैसा दूंगा।

रमेश को छोटू की बात समझ में नहीं आई रमेश बोला -" मैं तो इंसान हूं । मैं भालू कैसे बन सकता हू ? "

रमेश की बात सुनकर छोटू हंसा और हंसते हुए बोला - " भाई तुम्हें सचमुच भालू नहीं बनना है तुम्हें तो सिर्फ भालू के कपड़े पहन कर लोगों के सामने भालू जैसा देखना है और भालू जैसा व्यवहार करना है। इसके बदले मैं तुम्हें बहुत सारा पैसा दूंगा जिससे तुम्हारी गरीबी दूर हो जाएगी। "

पैसों के लालच में रमेश छोटू की बातों में आ गया और भालू बनने के लिए तैयार हो गया। अब रमेश प्रतिदिन भालू के कपड़े पहन कर लोगों का मनोरंजन करता था और लोगों को यह लगता था कि यह असली भालू है और चिड़ियाघर के इस भालू की ख्याति दूर-दूर तक फैल गई और चिड़िया घर आने वाले लोगों मैं तेजी से इजाफा होने लगा । इस प्रकार छोटू और रमेश मिलकर मोटी रकम कमाने लगे।
Chidiyaghar ka bhalu -ek kahani
 Bhalu  aur Sher ki kahani 



एक दिन भालू शेर के पिंजरे के ऊपर खड़ा होकर लोगों का मनोरंजन कर रहा था तभी पिंजरे की छत टूट गई और भालू शेर के सामने जा गिरा । भालू बने रमेश को लगा कि अब शेर उसे खा जाएगा डर के कारण रमेश रोने लगा।

भालू बना रमेश जब रो रहा था तो उसके रोने की आवाज बिल्कुल इंसानों जैसी थी तभी शेर भालू के पास आया और उसके कान में बोला- " रमेश ! तुम इस तरह रोओगे तो लोगों को समझ में आ जाएगा कि तुम भालू नहीं इंसान हो। "

शेर को इंसानों की तरह बात करते देख रमेश को बड़ा आश्चर्य हुआ किन्तु थोड़ी ही देर में रमेश समझ गया कि जिस तरह वह नकली भालू बना है उसी तरह यह शेर भी नकली है।

शेर और भालू का वार्तालाप चिड़ियाघर में आये लोगों ने सुन लिया और उन्हें समझ में आ गया चिड़ियाघर के लोग उन्हें नकली भालू और शेर दिखाकर उल्लू बना रहे हैं। लोगों ने तुरंत ही शेर का पिंजरा तोड़ दिया और भालू और शेर की पिटाई शुरू कर दी। इसके पश्चात लोगों ने चिड़ियाघर के मालिक की भी पिटाई की और उन तीनों को पुलिस के हवाले कर दिया।

शिक्षा- चिड़ियाघर का भालू नामक कहानी से हमें शिक्षा मिलती है कि बुरे काम का नतीजा हमेशा बुरा ही होता है। इसलिए बुरे कामों से हमेशा दूर रहना चाहिए |

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